
मऊ। प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद भी एआरटीओ कार्यालय में बाहरी लोगों का प्रवेश नहीं थम रहा है। डीएल और वाहन से संबंधित सभी कार्यों के लिए अलग-अलग काउंटर हैं, फिर भी बाहरी लोग पीछे के रास्ते से अंदर बैठकर मनमर्जी से काम कराते हैं।
बिना देखे बिना जांच के किसी भी व्यक्ति के गाड़ी का हो जाता फिटनेस कुछ कार्यालय के चिन्हित दलाल ही करते गाड़ियों का फिटनेस चाहे उस गाड़ी का शीशा टूटा हो या इंडिकेटेड टूटा हो या सीट बदली गई हो उन गाड़ियों का भी यहां आराम से हो जाएगा फिटनेस।
जिस बाबू की जिम्मेदारी है कि गाड़ी की समीक्षा कर फिटनेस करे उन बाबू के पास तो समय का अभाव दिखाई पड़ा ।
वही कार्यालय के बाहर स्थित दुकानों पर ऑनलाइन आवेदन कराकर दलाल आवेदक से काम के अनुसार जल्दी के लिए 30 से 40 फीसदी अधिक शुल्क लेते हैं। फिर उसमें से बाबुओं के अलावा अधिकारियों तक हिस्सा पहुंचाया जाता है। यदि कोई व्यक्ति अकेले पहुंचकर आवेदन करता है तो काउंटर पर बैठे बाबू कुछ न कुछ कमी बताकर दौड़ाते हैं।
ड्राइविग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद बिना हजार-दो हजार खर्च किए टेस्ट पास नहीं कर सकते। थक हारकर उसे दलालों का सहारा लेना ही पड़ता है। उनके दखल के बगैर यहां छोटा काम भी होना मुश्किल है। परिसर के बाहर ही दलाल सांठगांठ कर लेते हैं। और कुछ जो अंदर दलाल है वह भी उसमें अपना कमीशन सेट कर देते हैं
एआरटीओ के चेंबर में कुर्सी खाली थी, यात्रीकर अधिकारी भी वहां नहीं थे। हर काउंटर पर एक बाबू तैनात है, लेकिन एक एक दो काउंटर के बाद सभी खाली दो कमरे बाहर से बंद मिले। वहीं लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए कार्यालय के अंदर बैठा व्यक्ति के तेवर वह था कि जैसे वही एआरटीओ हो बिभाग में ऊपरी आमदनी के आधार पर उसे वहां बैठाया गया है।
रिटायर हो चुके एक बड़े बाबू वर्तमान लिपिकों के साथ बैठकर फाइलों का काम देखते हैं। बताया जा रहा उनको इसके लिए मानदेय भी दिया जाता है। यह ऑफिस खुलने पर पहुंचते हैं और ऑफिस बंद होने के बाद ही घर जाते हैं। चेचिस बनवाने, वाहन का टैक्स जमा करने, परमिट, फिटनेस आदि के लिए एआरटीओ साहब उन्हीं से बात करने के लिए भेज देते हैं। धन्य है विभाग इसलिए की यहां
वेटिंग में रहते हैं दलाल।